लॉकडाउन से घबराएं नहीं, सरकार नागरिकों को देगी हर ये जरूरी सुविधा, यहां जानें सबकुछ

नई दिल्‍ली. देश में बढ़ते कोरोना वायरस (Coronavirus) के खतरे से निपटने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने मंगलवार को बड़ी घोषणा की है. उनके अनुसार देश में 24 मार्च रात 12 बजे से 21 दिन के लिए लॉकडाउन (India Lockdown) किया जा रहा है. लेकिन सरकार के इस कदम से आम लोगों को परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है. यह सिर्फ लोगों को संक्रमण से बचाने के लिए किया जा रहा है. इस बीच सरकार लोगों तक सभी आवश्‍यक वस्‍तुओं की सप्‍लाई जारी रखेगी. इसकी जानकारी गृह मंत्रालय ने दी है. यहां जानिये उन सभी सेवाओं और वस्‍तुओं के बारे में जो आप तक पहुंचती रहेंगी.

यहां जानें सभी सवालों के जवाब-

कौन-कौन से सरकारी ऑफिस खुलेंगे?

रक्षा विभाग, केंद्रीय सशत्र बल, कोषागार, सार्वजनिक सेवाएं (पेट्रोल, सीएनजी, पीएनजी), डिजास्‍टर मैनेजमेंट, पावर जनरेशन, पोस्‍ट ऑफिस, राष्‍ट्रीय सूचना केंद्र खुले रहेंगे.

कौन-कौन सी सरकारी सेवाएं जारी?

पुलिस, होमगार्ड, सिविल डिफेंस, दमकल और आपातकालीन सेवाएं, डिजास्‍टर मैनेजमेंट, जेल, जिला प्रशासन, राज्‍य कोषागार, बिजली सेवाएं, जल सेवाएं, स्‍वच्‍छता संबंधी सेवाएं, नगर निगम (सिर्फ जरूरी सेवाएं दे रहे लोग, जैसे स्‍वच्‍छता और पानी सप्‍लाई मुहैया कराने वाले कर्मी) खुले रहेंगे.

स्‍कूल खुलेंगे क्‍या?

सभी स्‍कूल, शैक्षणिक संस्‍थाएं, कोचिंग बंद रहेंगी.

क्‍या अस्‍पताल और दवा दुकानें खुली रहेंगी?

सभी सरकारी और निजी अस्‍पताल, क्‍लीनिक, मेडिकल स्‍टोर, एंबुलेंस, डिस्‍पेंसरी खुले रहेंगे. स्‍वास्‍थ्‍य सेवाएं दे रहे लोगों की आवाजाही के लिए परिवहन के साधन जारी रहेंगे.

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Ministry of Home Affairs guidelines for the 21-day lockdown, list of essential services that will remain open.

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राशन, सब्‍जी, दूध का क्‍या होगा?

सभी राशन दुकानें, फल और सब्‍जी की दुकानें, डेयरी और दूध की दुकानें, मीट-मछली की दुकानें, जानवरों के चारे की दुकानें खुली रहेंगी. जिला प्रशासन सड़कों पर भीड़भाड़ कम रखने के लिए इन वस्‍तुओं की होम डिलीवरी भी सुनिश्चित कर सकता है.

एटीएम से पैसे निकलेंगे क्‍या?

सभी बैंक, इंश्‍योरेंस ऑफिस और एटीएम खुले रहेंगे.

टीवी चलेगी, अखबार आएगा क्‍या?

प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का काम जारी रहेगा. संचार सेवाएं, प्रसारण सेवाएं, इंटरनेट सेवाएं जारी रहेंगी.

सामान की होम डिलीवरी होगी क्‍या?

ई-कॉमर्स के जरिये खाने पीने की वस्‍तुओं, दवाओं, मेडिकल उपकरण की होम डिलीवरी जारी रहेगी. मतलब आप वेबसाइट पर ऑर्डर करके ये सामान घर पर मंगा पाएंगे.

पेट्रोल और रसोई गैस का क्‍या होगा?

पेट्रोल पंप, एलपीजी यानी रसोई गैस, गैस गोदाम और उनकी दुकानें खुली रहेंगी. कोल्‍ड स्‍टोरेज, वेयरहाउस और प्राइवेट सिक्‍योरिटी सेवाएं जारी रहेंगी.

ANI

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My fellow citizens, THERE IS ABSOLUTELY NO NEED TO PANIC. Essential commodities, medicines etc would be available. Centre & various state governments will work in close coordination to ensure this. Together, we will fight and create a healthier India. Jai Hind!: PM Modi

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उद्योगों का क्‍या होगा?

सभी आवश्‍यक सामान की मैन्‍यूफैक्‍चरिंग यूनिट चालू रहेंगी. कुछ प्रोडक्‍शन यूनिट को राज्‍य सरकार की अनुमति लेनी होगी.

ट्रांसपोर्ट का क्‍या होगा?

रेल, उड़ान और सड़क परिवहन सेवाएं पूरी तरह बंद रहेंगी. सिर्फ जरूरी वस्‍तुओं की आपूर्ति करने वाले वाहन, दमकल वाहन, पुलिस-प्रशासन के वाहन और आपातकालीन सेवाओं वाले वाहन चलेंगे.

होटल खुलेंगे क्‍या?

सिर्फ वही होटल, लॉज खुलेंगे, जहां लॉकडाउन के दौरान लोग फंसे हुए हैं या जिन्‍हें क्‍वारंटीन के लिए लिया गया है.

धार्मिक स्‍थानों पर जा सकेंगे?

लॉकडाउन के दौरान सभी धार्मिक स्‍थल भी लोगों के लिए बंद रहेंगे. किसी भी धार्मिक आयोजन की अनुमति नहीं होगी (अपरिहार्य स्थिति को छोड़कर).

शादी-ब्‍याह का क्‍या होगा?

देश में सभी तरह के सामाजिक, राजनीतिक, खेल, मनोरंजन, शैक्षणिक, सांस्‍कृतिक, धार्मिक क्षेत्र से जुड़े हुए सभी कार्यक्रम प्रतिबंधित रहेंगे. किसी भी तरह की भीड़ एकत्र होने पर पाबंदी रहेगी. अंतिम संस्‍कार के दौरान 20 लोगों से अधिक के एकत्र होने पर पाबंदी रहेगी.

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योगी आदित्यनाथ ने किया बड़ा ऐलान, मजदूरों को मिलेंगे 1000 रुपए

उत्तर प्रदेश से आ रही एक बड़ी खबर के बारे में। उत्तर प्रदेश सरकार ने कोरोना वायरस की वजह से हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए मजदूरों और गरीबों की मदद की ज़िम्मेदारी उठाया है।

योगी आदित्यनाथ ने कोरोना वायरस को बहुत बड़ा कदम उठाया है। जिसमें उन्होंने मजदूरों को जरूरतें पूरा करने के लिए ₹1000 देने का ऐलान किया है। योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह बात कही। लगभग 35 लाख लोगों को हजार हजार रूपए तक जरूरतों को पूरा करने के लिए दिया जाएगा।

योगी सरकार का अब तक का यह सबसे बड़ा कदम है। योगी सरकार के इस कदम के बारे में आपकी क्या राय है। हमें कमेंट करके जरूर बताएं और इस खबर को अधिक लोगों तक शेयर करें।

ये हैं वो 22 चेहरे जो 15 महीने में ही ‘निगल’ गए कमलनाथ की सरकार

भोपाल/ फ्लोर टेस्ट से पहले ही मध्यप्रदेश के सीएम कमलनाथ ने इस्तीफा दे दिया है। उससे पहले उन्होंने मीडिया से बात की और कहा कि मेरा कसूर क्या था। साथ ही सीएम ने यह भी कहा कि आज के बाद कल आता है, कल के बाद परसों भी आता है। लेकिन इस्तीफा देने वाले 22 विधायकों के कदम से वह आहत भी दिखे। ऐसे में आइए हम आपको बताते हैं, उन 22 चेहरों के बारे में जिनकी वजह से कमलनाथ की सरकार पंद्रह महीने में ही गिर गई।

कांग्रेस से इस्तीफा देने वाले सभी 22 विधायक ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे के हैं। दिग्विजय सिंह ने जब बीजेपी पर हॉर्स ट्रेडिंग का आरोप लगाया तो उसके कुछ दिन बाद ही सिंधिया खेमे के सारे विधायक और मंत्री गायब हो गए। ये सभी जाकर बेंगलुरू में रुक गए। सिंधिया के बीजेपी में शामिल होने के बाद सभी विधानसभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा भेज दिया। स्पीकर ने पहले छह विधायकों का इस्तीफा स्वीकारा, उसके बाद बाकी 16 विधायकों का।

ये हैं इस्तीफा देने वाले विधायक

1. तुलसी सिलावट: कमलनाथ की सरकार में स्वास्थ्य मंत्री थे। ज्योतिरादित्य सिंधिया के करीबी थे, बगावत के बाद कमलनाथ ने पहले इन्हेें अपने कैबिनेट से बर्खास्त किया। उसके बाद स्पीकर ने भी इनका इस्तीफा मंजूर किया। तुलसी सिलावट ने इस्तीफा देने के बाद सरकार पर आरोप लगाया कि हमारी सुनी नहीं जाती थी।

2. गोविंद सिंह राजपूत: यह भी ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे के मंत्री थी। कमलनाथ की सरकार में परिवहन मंत्री थे। बर्खास्त होने वाले मंत्रियों की सूची में इनका भी नाम था। मंत्रिमंडल से बर्खास्त होने के बाद ही स्पीकर ने इनका इस्तीफा मंजूर किया। कहा कि सरकार में अधिकारी हमसे अधिक ताकतवर थे।

3. प्रद्युमन सिंह तोमर: ज्योतिरादित्य सिंधिया के पक्का वाला भक्त हैं। सार्वजनिक जगहों पर भी उनके चरणों में लोट जाते हैं। कमलनाथ की सरकार में खाद्य आपूर्ति मंत्री थे। इन्होंने कहा कि हमने अपनी मर्जी से इस्तीफा दिया है। आज मैं जो कुछ भी श्रीमंत सिंधिया जी की वजह से हूं।

4. प्रभुराम चौधरी: कमलनाथ की सरकार में प्रभुराम चौधरी स्कूली शिक्षा मंत्री थे। पेशे से डॉक्टर भी हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रति लॉयल हैं। इन्होंने भी बेंगलुरू से ही अपना इस्तीफा भेजा था। भोपाल वापसी की मांग पर कई बार वीडियो जारी कर कहा कि मेरे ऊपर कोई दबाव नहीं है।

5. महेंद्र सिंह सिसोदिया: यह भी ज्योतिरादित्य सिंधिया गुट के कद्दावर नेता थे। यह भी बेंगलुरू में हैं, इन्होंने भी कहा था कि मैं अपनी मर्जी से इस्तीफा दिया हूं। इस्तीफा से पहले इन्होंने सरकार को चेतावनी भी दी थी कि महाराज की अनदेखी हुई तो सरकार पर संकट के घने काले बादल छाएंगे जो छटेगा नहीं।

6. इमरती देवी: कमलनाथ की कैबिनेट में महिला एवं बाल विकास मंत्री रहीं इमरती देवी भी सिंधिया भक्त हैं। सिंधिया के प्रति वह इतनी लॉयल हैं कि कुएं में छलांग लगाने को भी तैयार रहती हैं। इन्होंने भी अपना इस्तीफा बेंगलुरू से ही भेजा था। स्पीकर ने बाद में इनका इस्तीफा स्वीकार किया।

7. ऐदल सिंह कंषाना: यह सुमावली से विधायक थे, सरकार में अनदेखी की वजह से नाराज थे। चौथी बार वह विधानसभा पहुंचे थे। ज्योतिरादित्य सिंधिया गुट के नेता थे। आरोप लगाया कि मंत्री और अधिकारी बात नहीं सुनते थे।

8. रघुराज सिंह कंषाना: यह मुरैना से विधायक थे। 2018 में पहली बार विधानसभा में चुनकर आए थे। ज्योतिरादित्य सिंधिया गुट के हैं, महाराज की अनदेखी की वजह से सरकार से नाराज थे। बजट सत्र से ऐन पहले ये भी बेंगलुरू पहुंच गए और वहां से इस्तीफा भेज दिया। सरकार पर कई आरोप लगाए हैं।

9. गिर्राज डण्डौतिया: यह दिमनी से विधायक थे। ज्योतिरादित्य सिंधिया गुट के विधायक हैं। बेंगलुरू से इन्होंने भी अपना इस्तीफा भेज दिया था, जिसे स्पीकर ने स्वीकार कर लिया है। ये भी पहली बार विधानसभा चुनाव जीतकर सदन में पहुंचे थे।

10. कमलेश जाटव: यह अम्बाह से विधायक थे। कमलेश जाटव ने भी ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक हैं। उनके इस्तीफे के बाद ये भी बेंगलुरू चले गए थे। वहीं से विधानसभा अध्यक्ष को इस्तीफा भेज दिया।

11.ओपीएस भदौरिया: यह मेहगांव से विधायक थे। यह भी बेंगलुरू में हैं। वहीं से स्पीकर को अपना इस्तीफा भेज दिया था। वीडियो जारी कर कहते रहे कि हम महाराज सिंधिया के साथ ही हैं।

12. रणवीर जाटव: यह गोहद से विधायक हैं। सरकार में अनदेखी की वजह से नाराज थे। सिंधिया ने बगावत की तो ये भी बेंगलुरू चले गए। आखिरी वक्त तक भोपाल नहीं लौटे और ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ ही डंटे रहे। स्पीकर ने इनका भी इस्तीफा स्वीकार कर लिया है।

13. मुन्नालाल गोयल: यह ग्वालियर पूर्व से कांग्रेस के विधायक थे। ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रति लॉयल थे। आखिरी वक्त तक वह नहीं माने और ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ खड़े रहे। स्पीकर ने देर रात उनका भी इस्तीफा स्वीकार कर लिया है।

14. रक्षा संतराम सरौनिया: यह भाण्डेर से विधायक थीं। कांग्रेस के बागी विधायकों के साथ यह भी बेंगलुरू में डटी रहीं। साथ ही वीडियो जारी कर इन्होंने भी कहा कि मैं ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ ही हूं। आरोप लगाया कि सरकार में हमारी सुनी नहीं जाती थी।

15. जसमंत जाटव छितरी: यह करेरा से विधायक थे। ज्योतिरादित्य सिंधिया गुट के हैं। कांग्रेस से बगावत कर यह भी बेंगलुरू चले गए थे। इनका भी इस्तीफा स्पीकर ने स्वीकार कर लिया है।

16. सुरेश धाकड़: यह पोहरी से विधायक थे। ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे के थे। सरकार में उपेक्षा की वजह से नाराज थे। ये बगावत कर बेंगलुरू चले गए थे। वहीं से अपना इस्तीफा भेज दिया था, जिसे स्पीकर फ्लोर टेस्ट से पहले स्वीकार कर लिया था।

17. जजपाल सिंह: यह अशोकनगर से विधायक थे। ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ यह भी खड़े रहे हैं। इन्होंने ने भी बेंगलुरू से अपना इस्तीफा भेज दिया था, जिसे स्पीकर ने स्वीकार कर लिया है।

18. बृजेंद्र सिंह यादव: यह मुंगावली से विधायक थे। ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ बगावत के बाद से खड़े रहे। वीडियो जारी कर इन्होंने भी कमलनाथ की सरकार पर कई आरोप लगाए थे। स्पीकर ने इनका भी इस्तीफा मंजूर कर लिया है।

19. बिसाहू लाल सिंह: यह कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक थे और आठ बार विधायक रहे हैं। इन्होंने इस्तीफा देकर सिंधिया से पहले ही भोपाल में बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। साथ ही कहा था कि अब हमारे नेता शिवराज सिंह चौहान हैं। इनका इस्तीफा भी स्पीकर ने स्वीकार कर लिया है।

20. मनोज नारायण सिंह चौधरी: यह हाटपिपल्या से विधायक थे। शुरू से ही ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ खड़े रहे। इनके पिता इनसे मिलने के लिए बेंगलुरू भी गए थे लेकिन पुलिस ने मनोज से मिलने नहीं दिया। मनोज चौधरी का इस्तीफा भी स्पीकर ने स्वीकार कर लिया है।

21. राजवर्द्धन सिंह: यह बदनावर से विधायक थे। कमलनाथ की सरकार पर कई संगीन आरोप लगाए हैं। इस्तीफा भेजने के बाद इन्होंने कहा था कि सरकार में हमारी सुनी ही नहीं जा रही थी। इनका भी इस्तीफा स्पीकर ने स्वीकार कर लिया है।

22. हरदीप सिंह डंग: यह सुवासरा से विधायक थे। इन्होंने अपने इस्तीफे में लिखा था कि हम किसी गुट के नहीं हैं। हम सिर्फ कांग्रेस के सिपाही थे। लेकिन ये सरकार हमारी सुन नहीं रही थी। हम इकलौते सिख विधायक थे, फिर भी हमें मंत्री नहीं बनाया गया। स्पीकर ने इनका भी इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है।

पूरी दुनिया के लिए सबसे बड़ी ख़बर, मिल गई है कोरोना वायरस की दवा

नई दिल्ली: कोरोना वायरस (Corona Virus) को लेकर दुनियाभर में मची दहशत के बीच एक राहत भरी खबर आ रही है. अगर गार्डियन (Guardian) अखबार की खबर सही माने तो कोरोना की दवाई मिल गई है. अखबार ने खबर दी है कि चाइना में मेडिकल अथॉरिटीज का कहना है कि जापान के नये टाइप के इंफ्लुएंजा ट्रीट करने की दवाई कोरोना वायरस को ट्रीट करने में इफेक्टिव साबित है रही है.

इस दवाई का नाम है फेवीपिराविर (favipiravir). इसे एविगन (Avigan) के नाम से भी जाना जाता है.

चीन के साइंस एंड टेक्नॉलिजी मंत्री के अधिकारीसांग शीनमिन के मुताबिक वुहान और शेनजेन में इस दवाई का 340 लोगों पर क्लिनिकल ट्रायल किया गया है. ये अब तक की सबसे ज्यादा इफेक्ट करने वाली दवाई है. इसमें मरीज को 4 दिन में कोरोना पॉजिटिव से नेगटिव होते देखा गया है. लोगों के फेफड़े 91% पर ठीक हो गए. जबकि बाकी ड्रग में ये इफेक्ट 62% देखा गया.
जापान में डॉक्टर भी इस दवाई का प्रयोग कर रहे हैं. जापान के डॉक्टर ये तो मानते हैं कि शुरुआती हल्के फुल्के लक्षण इस दवाई से ठीक किये जा सकते हैं पर बहुत गंभीर स्थिति होने पर ये दवाई काम नहीं करती . हालांकि HIV मरीज को दी जानू वाली दवाई के साथ भी इसी तरह की लिमिटेशन देखी गई है. हाल ही में जयपुर के डॉक्टर्स ने कोरोना पीड़ित को HIV ठीक करने वाली दवाईयां दी थी जिसके रिजल्ट थोड़े बेहतर आए थे.

कम होने लगा है कोरोना इफेक्ट? चीन ने कहा- तीन महीने में पहली बार कोई नया मामला सामने नहीं आया!
कोरोना वायरस (Coronavirus) को लेकर भारत समेत दुनियाभर के कई देश युद्धस्तर की लड़ाई लड़ रहे हैं. इस बीच चीन से एक अच्छी खबर आई है. चीन में बीते तीन महीने में पहली बार ऐसा हुआ है कि कोरोना का एक भी घरेलू (Domestic) मरीज सामने नहीं आया है. हालांकि यहां 34 विदेशी नागरिकों में कोरोना की पुष्टि हुई है.

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आपको बता दें कि जनवरी महीने में चीन में कोरोना वायरस के संक्रमण की शुरुआत हई थी और देखते ही देखते इस बीमारी ने दुनियाभर में कोहराम मचा दिया. अकेले चीन में इस महामारी से मरने वालों की संख्या तीन हजार के पार पहुंच गई है.

समाचार एजेंसी AFP की खबर के मुताबिक, चीन ने कहा है कि बुधवार (18 मार्च) को एक भी चीनी नागरिक में कोरोना वायरस का नया मामला सामने नहीं आया. साथ ही चीन ने यह भी कहा है कि गुरुवार को 34 विदेशी नागरिकों में कोरोने के मामलों की पुष्टि हुई है. राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग के अनुसार, विदेशी नागरिकों में 34 नए मामले सामने आए हैं जो कि बीते दो सप्ताह में सबसे बड़ी दैनिक वृद्धि है.