तुमको पाकर ना जाने क्यों लगा सब ख्वाइशें पूरी हुई है, बस वक़्त यही थम जाए अब यही एक तमन्ना बाकी है

एक तुम्हें पाने की चाह में इन नज़रो के दिये जलाये बैठे है, कभी तो हमारी वफ़ा पर यकीन होगा इस उम्मीद पर सब भूल कर बैठे है, चले आओ फीकी ना पड़ जाए इन लबो की लाली, हम आपके इंतज़ार में मुदत से सजे बैठे है

उनका यह लगाव कब प्यार में बदलेगा इस उम्मीद में वक़्त बिताए जाते हैं, आते तो वो रोज़ है मिलने पर हमारे है कहने से घबराते है

मुझे जगाने को तुम्हारी याद ही काफी है, इस सूरज से कहो अपनी रोशनी कही औऱ ले जाये, तकिये को चूमते है मेहबूब समझ कर इश्क़ में कोई किसी के इतना भी पागल ना हो जाये

तुझसे हार कर भी जीत जाती हूँ मैं, फ़र्क़ इतना है तुझपर दिल हारा है औऱ तेरी यादों को पाया हैं औऱ तुझे खवाबों में अपना बनाया है

तेरी मोहब्बत ने किसी काबिल बना दिया, आज दुनिया देख के हँसती तो है ,दिल तो हमारा टूटा लबो पर जीत की मुस्कान गैरो के तो है

एहसास भी ना होगा हम दूर हो जाएंगे, धीरे धीरे आपकी ज़िंदगी से निकल जाएंगे, पर इतना तो यकीन है अपनी वफ़ा पर, जब भी याद आयेंगे लबो पर हँसी आँखों में आँसू दे जाएँगे

बड़े वोह हो

मुझे कैसे मिले सकूँ जब तुम रात रात भर जागते हो, बस मुझसे ही नही होती बाते ना जाने कितनी से चोंच लड़ाते हो

तुम हसीन ख्वाब मेरे

तुमको क्या बताये हाल ए दिल अपना, यह धड़कता ही नही तुमको देखे बिना, कह दो के ना जायोगे कभी दूर हमसे, बस इन पलकों में रहो हरदम बनके सपना