मे लोगो की बातो को

मे लोगो की बातो को जरा भर भी नही सुनता

मेरा दिल अब भी कहता है

उसे मुझसे मोहब्बत है

नाजूक लगते थे हसीन लोग

नाजूक लगते थे हसीन लोग

वास्ता पडा तो पत्थर के निकले

मेरे दिल के दरवाजे पे लिखा था अदंर आना मना है

मेरे दिल के दरवाजे पे लिखा था अदंर आना मना है

इश्क मुस्कुराता हुँआ बोला माँफ करना मे अन्घा हुँ

उसकी मोहब्बत का सिलसिला भी क्या अजिब था

उसकी मोहब्बत का सिलसिला भी क्या अजिब था

अपना भी नही बनाया और किसी और का भी नही होने दिया

समेट कर ले जाओ अपने झूटे वादे

समेट कर ले जाओ अपने झूटे वादे के अघूरे किस्से

अगली मोहब्बत मे तुम्हे फिर इनकी जरुरत पडेगी

दिल से हम भुलाओगे केसे

दिल से हमे भुलाओगे कैसे

हम वो खुशबु है जो  साँसो मे बसते है

खुद की साँसो को रोक पाओगे कैसे

अभी घुप निकलने के बाद

(1) अभी घुप निकलने के बाद भी जो सोया है

वो तेरी याद मे रात भर रोया है

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(2) जिनके दिल पे चोट लगती है ना दोस्तो,

वो आँखो से नही दिल से रोते है

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(3) यह दिल कितना भोला है,

hurt होकर भी Expectations रखता है

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(4) उम्मीद से बढ के निकली पगली तू तो,

सोचा दिल ही तोडेगी पर तूने तो मुझे ही तोड दिया

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(5)  कमी तो होनी ही है पानी की शहर मे,

न किसी की आँख मे बचा है न 

किसी के जज्बात मे

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