तुम क्या जानो कितना तड़पते है हम, बस देख के तुमको साँस लेते है हम, ना जाया करो पल भर भी इन नज़रो से दूर , सिर्फ तुम्हारे लिए ही तो हर सुबह आँखे खोलते है हम

तुम साँसों मे बसे हो खुश्बू की तरह, तुम दिल में छुपे हो धड़कन की तरह, इल्तिजा है इस ज़िंदगी में भी आ जाओ हमसफ़र की तरह

हम तो बस चंद साँसों को समेटे बैठे थे, वोह ज्यों ज्यों पास आते गए चाहत जगती गयी ख्वाईशें बढ़ती गयी

तेरी याद में चलते चलते इतनी दूर निकल आये है, ना कोई साथ रहा ना तुम ही मिले,

सदियों के फासले तय किए हमने पर ना मंज़िल मिली ना सुनसान रास्तो पर किनारे मिले

तुमको चाहा है औऱ चाहेगे हर पल बस यही चाहत है,  तेरा प्यार ना सही दीदार रोज हो जाये यही तमन्ना है