हम तो बस चंद साँसों को समेटे बैठे थे, वोह ज्यों ज्यों पास आते गए चाहत जगती गयी ख्वाईशें बढ़ती गयी

Author: Rooh

hyy मे एक शायर हुँ और मे शायरी करता हुँ

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