ये हैं वो 22 चेहरे जो 15 महीने में ही ‘निगल’ गए कमलनाथ की सरकार

भोपाल/ फ्लोर टेस्ट से पहले ही मध्यप्रदेश के सीएम कमलनाथ ने इस्तीफा दे दिया है। उससे पहले उन्होंने मीडिया से बात की और कहा कि मेरा कसूर क्या था। साथ ही सीएम ने यह भी कहा कि आज के बाद कल आता है, कल के बाद परसों भी आता है। लेकिन इस्तीफा देने वाले 22 विधायकों के कदम से वह आहत भी दिखे। ऐसे में आइए हम आपको बताते हैं, उन 22 चेहरों के बारे में जिनकी वजह से कमलनाथ की सरकार पंद्रह महीने में ही गिर गई।

कांग्रेस से इस्तीफा देने वाले सभी 22 विधायक ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे के हैं। दिग्विजय सिंह ने जब बीजेपी पर हॉर्स ट्रेडिंग का आरोप लगाया तो उसके कुछ दिन बाद ही सिंधिया खेमे के सारे विधायक और मंत्री गायब हो गए। ये सभी जाकर बेंगलुरू में रुक गए। सिंधिया के बीजेपी में शामिल होने के बाद सभी विधानसभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा भेज दिया। स्पीकर ने पहले छह विधायकों का इस्तीफा स्वीकारा, उसके बाद बाकी 16 विधायकों का।

ये हैं इस्तीफा देने वाले विधायक

1. तुलसी सिलावट: कमलनाथ की सरकार में स्वास्थ्य मंत्री थे। ज्योतिरादित्य सिंधिया के करीबी थे, बगावत के बाद कमलनाथ ने पहले इन्हेें अपने कैबिनेट से बर्खास्त किया। उसके बाद स्पीकर ने भी इनका इस्तीफा मंजूर किया। तुलसी सिलावट ने इस्तीफा देने के बाद सरकार पर आरोप लगाया कि हमारी सुनी नहीं जाती थी।

2. गोविंद सिंह राजपूत: यह भी ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे के मंत्री थी। कमलनाथ की सरकार में परिवहन मंत्री थे। बर्खास्त होने वाले मंत्रियों की सूची में इनका भी नाम था। मंत्रिमंडल से बर्खास्त होने के बाद ही स्पीकर ने इनका इस्तीफा मंजूर किया। कहा कि सरकार में अधिकारी हमसे अधिक ताकतवर थे।

3. प्रद्युमन सिंह तोमर: ज्योतिरादित्य सिंधिया के पक्का वाला भक्त हैं। सार्वजनिक जगहों पर भी उनके चरणों में लोट जाते हैं। कमलनाथ की सरकार में खाद्य आपूर्ति मंत्री थे। इन्होंने कहा कि हमने अपनी मर्जी से इस्तीफा दिया है। आज मैं जो कुछ भी श्रीमंत सिंधिया जी की वजह से हूं।

4. प्रभुराम चौधरी: कमलनाथ की सरकार में प्रभुराम चौधरी स्कूली शिक्षा मंत्री थे। पेशे से डॉक्टर भी हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रति लॉयल हैं। इन्होंने भी बेंगलुरू से ही अपना इस्तीफा भेजा था। भोपाल वापसी की मांग पर कई बार वीडियो जारी कर कहा कि मेरे ऊपर कोई दबाव नहीं है।

5. महेंद्र सिंह सिसोदिया: यह भी ज्योतिरादित्य सिंधिया गुट के कद्दावर नेता थे। यह भी बेंगलुरू में हैं, इन्होंने भी कहा था कि मैं अपनी मर्जी से इस्तीफा दिया हूं। इस्तीफा से पहले इन्होंने सरकार को चेतावनी भी दी थी कि महाराज की अनदेखी हुई तो सरकार पर संकट के घने काले बादल छाएंगे जो छटेगा नहीं।

6. इमरती देवी: कमलनाथ की कैबिनेट में महिला एवं बाल विकास मंत्री रहीं इमरती देवी भी सिंधिया भक्त हैं। सिंधिया के प्रति वह इतनी लॉयल हैं कि कुएं में छलांग लगाने को भी तैयार रहती हैं। इन्होंने भी अपना इस्तीफा बेंगलुरू से ही भेजा था। स्पीकर ने बाद में इनका इस्तीफा स्वीकार किया।

7. ऐदल सिंह कंषाना: यह सुमावली से विधायक थे, सरकार में अनदेखी की वजह से नाराज थे। चौथी बार वह विधानसभा पहुंचे थे। ज्योतिरादित्य सिंधिया गुट के नेता थे। आरोप लगाया कि मंत्री और अधिकारी बात नहीं सुनते थे।

8. रघुराज सिंह कंषाना: यह मुरैना से विधायक थे। 2018 में पहली बार विधानसभा में चुनकर आए थे। ज्योतिरादित्य सिंधिया गुट के हैं, महाराज की अनदेखी की वजह से सरकार से नाराज थे। बजट सत्र से ऐन पहले ये भी बेंगलुरू पहुंच गए और वहां से इस्तीफा भेज दिया। सरकार पर कई आरोप लगाए हैं।

9. गिर्राज डण्डौतिया: यह दिमनी से विधायक थे। ज्योतिरादित्य सिंधिया गुट के विधायक हैं। बेंगलुरू से इन्होंने भी अपना इस्तीफा भेज दिया था, जिसे स्पीकर ने स्वीकार कर लिया है। ये भी पहली बार विधानसभा चुनाव जीतकर सदन में पहुंचे थे।

10. कमलेश जाटव: यह अम्बाह से विधायक थे। कमलेश जाटव ने भी ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक हैं। उनके इस्तीफे के बाद ये भी बेंगलुरू चले गए थे। वहीं से विधानसभा अध्यक्ष को इस्तीफा भेज दिया।

11.ओपीएस भदौरिया: यह मेहगांव से विधायक थे। यह भी बेंगलुरू में हैं। वहीं से स्पीकर को अपना इस्तीफा भेज दिया था। वीडियो जारी कर कहते रहे कि हम महाराज सिंधिया के साथ ही हैं।

12. रणवीर जाटव: यह गोहद से विधायक हैं। सरकार में अनदेखी की वजह से नाराज थे। सिंधिया ने बगावत की तो ये भी बेंगलुरू चले गए। आखिरी वक्त तक भोपाल नहीं लौटे और ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ ही डंटे रहे। स्पीकर ने इनका भी इस्तीफा स्वीकार कर लिया है।

13. मुन्नालाल गोयल: यह ग्वालियर पूर्व से कांग्रेस के विधायक थे। ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रति लॉयल थे। आखिरी वक्त तक वह नहीं माने और ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ खड़े रहे। स्पीकर ने देर रात उनका भी इस्तीफा स्वीकार कर लिया है।

14. रक्षा संतराम सरौनिया: यह भाण्डेर से विधायक थीं। कांग्रेस के बागी विधायकों के साथ यह भी बेंगलुरू में डटी रहीं। साथ ही वीडियो जारी कर इन्होंने भी कहा कि मैं ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ ही हूं। आरोप लगाया कि सरकार में हमारी सुनी नहीं जाती थी।

15. जसमंत जाटव छितरी: यह करेरा से विधायक थे। ज्योतिरादित्य सिंधिया गुट के हैं। कांग्रेस से बगावत कर यह भी बेंगलुरू चले गए थे। इनका भी इस्तीफा स्पीकर ने स्वीकार कर लिया है।

16. सुरेश धाकड़: यह पोहरी से विधायक थे। ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे के थे। सरकार में उपेक्षा की वजह से नाराज थे। ये बगावत कर बेंगलुरू चले गए थे। वहीं से अपना इस्तीफा भेज दिया था, जिसे स्पीकर फ्लोर टेस्ट से पहले स्वीकार कर लिया था।

17. जजपाल सिंह: यह अशोकनगर से विधायक थे। ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ यह भी खड़े रहे हैं। इन्होंने ने भी बेंगलुरू से अपना इस्तीफा भेज दिया था, जिसे स्पीकर ने स्वीकार कर लिया है।

18. बृजेंद्र सिंह यादव: यह मुंगावली से विधायक थे। ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ बगावत के बाद से खड़े रहे। वीडियो जारी कर इन्होंने भी कमलनाथ की सरकार पर कई आरोप लगाए थे। स्पीकर ने इनका भी इस्तीफा मंजूर कर लिया है।

19. बिसाहू लाल सिंह: यह कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक थे और आठ बार विधायक रहे हैं। इन्होंने इस्तीफा देकर सिंधिया से पहले ही भोपाल में बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर ली थी। साथ ही कहा था कि अब हमारे नेता शिवराज सिंह चौहान हैं। इनका इस्तीफा भी स्पीकर ने स्वीकार कर लिया है।

20. मनोज नारायण सिंह चौधरी: यह हाटपिपल्या से विधायक थे। शुरू से ही ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ खड़े रहे। इनके पिता इनसे मिलने के लिए बेंगलुरू भी गए थे लेकिन पुलिस ने मनोज से मिलने नहीं दिया। मनोज चौधरी का इस्तीफा भी स्पीकर ने स्वीकार कर लिया है।

21. राजवर्द्धन सिंह: यह बदनावर से विधायक थे। कमलनाथ की सरकार पर कई संगीन आरोप लगाए हैं। इस्तीफा भेजने के बाद इन्होंने कहा था कि सरकार में हमारी सुनी ही नहीं जा रही थी। इनका भी इस्तीफा स्पीकर ने स्वीकार कर लिया है।

22. हरदीप सिंह डंग: यह सुवासरा से विधायक थे। इन्होंने अपने इस्तीफे में लिखा था कि हम किसी गुट के नहीं हैं। हम सिर्फ कांग्रेस के सिपाही थे। लेकिन ये सरकार हमारी सुन नहीं रही थी। हम इकलौते सिख विधायक थे, फिर भी हमें मंत्री नहीं बनाया गया। स्पीकर ने इनका भी इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है।

Author: Rooh

hyy मे एक शायर हुँ और मे शायरी करता हुँ

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