इश्क और मेरी बनती नही है साहब 

इश्क और मेरी बनती नही है साहब 

वो गुलामी चाहता है और मे बचपन से आजाद हुँ

Author: Rooh

hyy मे एक शायर हुँ और मे शायरी करता हुँ

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