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if you can feel me, we are not that far away. 💖

इस कारण प्रधानमंत्री ने दीया, मोमबत्ती और टॉर्च जलाने के लिए कहा, वजह जानकर होगी हैरानी

दोस्तो प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने कहा, 5 अप्रैल को रात 9 बजे घर की सभी लाइटें बंद करके, घर के दरवाजे पर या बालकनी में खड़े रहकर 9 मिनट के लिए मोमबत्ती, दीया, टॉर्च या मोबाइल की फ्लैशलाइट जलाने को कहा है।

दोस्तो आप लोगों को बताते की लाइट बंद करके टॉर्च मोमबत्ती व दिया जलाने के लिए प्रधानमंत्री जी ने क्यों कहा है। उन्होंने कहा जब हर व्यक्ति 11 मिनट दीया जल आएगा तो प्रकाश की उस महाशक्ति का एहसास होगा। उन्होंने कोरोना वायरस को अंधकार बताया है। जिसे मोमबत्ती, दीया और टॉर्च जला कर अंधकार में कोरोना संकट को पराजित करने का एहसास होगा।

उन्होने कहा इस कोरोना संकट से जो अंधकार और अनिश्चितता पैदा हुई है उसे समाप्त करके हमें उजाले और निश्चितता की तरफ बढ़ना है। इस अंधकारमय कोरोना संकट को पराजित करने के लिए हमें प्रकाश के तेज को चारो दिशाओं में फैलाना है। और इसे करने में हमें सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखना होगा

तबलीगी जमात कांड से भी नहीं ली नसीहत, अजमेर में भी दोहराई वही कहानी

कोरोना वायरस के खिलाफ जंग के बीच राजधानी दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में तबलीगी जमात का जलसा पूरे देश के लिए परेशानी का एक बड़ा सबब बन गया है।

नई दिल्ली। कोरोना वायरस के खिलाफ जंग के बीच राजधानी दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में तबलीगी जमात का जलसा पूरे देश के लिए परेशानी का एक बड़ा सबब बन गया है। इस जलसे में हिस्सा लेने वाले तमाम लोगों की कोरोना पॉजिटिव निकलने के बाद पूरे देश में हड़कंप मचा हुआ है। खबर है कि आयोजन में हिस्सा लेने वाले 400 से ज्यादा लोगों मैं कोरोना के लक्षण पाए गए हैं। पूरे देश को चिंता में डालने वाली इस घटना के बाद राजस्थान से भी एक बड़ी लापरवाही की खबर सामने आई है।

आयोजन में सबको चिंता में डाला

राजस्थान के अजमेर जिले में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह मुस्लिम अकीदतमदों के लिए श्रद्धा का बड़ा केंद्र है। यहां मंगलवार को हुए एक आयोजन ने सभी को चिंता में डाल दिया है। राजस्थान में भी कोरोना का प्रकोप फैला हुआ है और इस कारण लॉकडाउन का सख्ती से पालन किया जा रहा है।

चादर चढ़ाने की रस्म में पहुंची भीड़

लॉकडाउन के बीच ही मंगलवार को यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रमअजमेर में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के बड़े बेटे ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की प्रसिद्ध दरगाह में उर्स के मेले की चादर चढ़ाने का था। इस कार्यक्रम के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग और लॉकडाउन के सारे नियम धरे के धरे रह गए। मिली जानकारी के मुताबिक करीब 100 लोगों ने मस्जिद में पहुंचकर चादर चढ़ाने की रस्म शुरू कर दी।

लोगों के ना मानने पर लाठीचार्ज

जानकारी मिलने पर पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने भीड़ को समझाने की भरसक कोशिश की, लेकिन पुलिस के समझाने के बावजूद लोग नहीं माने। लोगों के जिद पर अड़े रहने के कारण पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। इस मामले में दरगाह के प्रमुख सहित छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है।

केवल 10 लोगों को मिली थी अनुमति

घटना के बारे में जानकारी देते हुए अजमेर के एसपी कुंवर राष्ट्रदीप ने बताया कि दरगाह शरीफ पर अंजुमन कमेटी दरगाह के सदस्यों ने चादर चढ़ाने का यह कार्यक्रम आयोजित किया था। अजमेर के जिलाधिकारी ने कमेटी के 10 सदस्यों को ही इस कार्यक्रम के लिए अनुमति दी थी मगर आदेश का उल्लंघन करते हुए काफी संख्या में लोग मस्जिद के पीछे वाले हिस्से से पहुंच गए।

एसपी ने बताया कि भीड़ को समझाने की पूरी कोशिश की गई मगर उनके न मानने पर हलका बल प्रयोग करके उन्हें खदेड़ दिया गया।

आदेश न मानने पर छह गिरफ्तार

लॉकडाउन के दौरान आदेश का उल्लंघन करके इस कार्यक्रम को आयोजित करने पर मस्जिद के प्रमुख सहित छह लोगों के खिलाफ राजस्थान एपिडिमिक डिजीज एक्ट के तहत मामला दर्ज करके उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार लोगों में जमालुद्दीन हुसैन, मोहम्मद मेराज, फकीर बाबा दरगाह सरवाड़, बसंत कुशवाहा, अजहर और नवाब कुरैशी के नाम शामिल हैं।

मरकज से तमाम लोग राजस्थान भी लौटे

इस बीच एक अन्य खबर के अनुसार दिल्ली में आयोजित तबलीगी जमात के मरकज में शामिल होने वाले लोगों में राजस्थान के लोग भी हैं। राज्य के चूरु, उदयपुर, अजमेर, टोंक और बाड़मेर से ऐसे लोगों को पकड़ा गया है जो मरकज में हिस्सा लेकर लौटे हैं। राज्य के अन्य लोगों तक कोरोनआ संक्रमण रोकने के लिए इन लोगों की पहचान करके स्क्रीनिंग भी कराई गई है। इन लोगों को आइसोलेशन में रखने के साथ ही इनके सैंपल जुटाकर जांच के लिए भेजे गए हैं।

सेना कर रही मरने वालों का अंतिम संस्कार, इटली में जनाज़ा निकालने पर बैन

खरतरनाक कोरोना वायरस ने सबसे ज्यादा इटली में तबाही मचाई है। इस वायरस के संक्रमण से मरने वालों का आंकड़ा लगातार इटली में बढ़ता जा रहा है। इटली में 6,153 संक्रमण के नए मामले सामने आए हैं। इस तरह से अब इटली में 80,539 मामले सामने आ चुके हैं।

इटली में मरने वालों की संख्या 8 हजार से पार

संक्रमित लोगों की यह संख्या चीन के बराबर हो गई है। इटली की सिविल प्रोटेक्शन एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार को 662 लोगों की मौत हो गई। इटली में मरने वालों की संख्या 8 हजार से पार कर गई है।

जनाज़े में जाने की इजाजत नहीं

हालात ये हैं कि अस्पतालों के शवगृह लाशों से भर गए हैं। आलम ये है कि जिसका रिश्तेदार गुजर गया है, उसे अकेले ही शोक मनाना पड़ता है। देश भर में लॉकडाउन है, ऐसे में किसी को जनाजे में भी जाने की इजाजत नहीं है। सरकार ही अंतिम संस्कार करा रही है। लोग एक दूसरे के गले लग कर रो तक नहीं सकते, जो चला गया उसकी सिर्फ यादें साझा कर सकते हैं।

सेना के ट्रकों में ले जाए जा रहे शव

सेना लिस्ट बनाकर मरने वालों का अंतिम संस्कार कर रही है। यही कारण है कि इन दिनों इटली की सड़कों पर लगातार मिलिट्री के ट्रक देखे जा रहे हैं। कोरोना वायरस ने यहां इतने लोगों की जान ले ली है कि शवों को ले जाने का और कोई तरीका नहीं बचा है।

जनाजे में नहीं हो सकता कोई शामिल

कोरोना वायरस के संक्रमण से पहले तक जहां लोग मरने वाले का अंतिम दर्शन करने और उसके जनाजे में शामिल होकर दुख व्यक्त करना चाहते थे वहीं अब कोरोना संक्रमण ने इस पर भी रोक लगा दी है। आलम ये है कि यदि कोरोना के संक्रमण से किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जा रही है तो लोग डर की वजह से उसके घर पहुंचकर शोक व्यक्त करने से भी कतरा रहे हैं। यदि मुस्लिम समुदाय के किसी व्यक्ति की मौत हो जा रही है और उसका जनाजा निकलता है तो उसमें शामिल नहीं हो रहे हैं। घर पर रहकर ही दुख जता दे रहे हैं।

नहीं लगाया जा सकता इटली की भयावह हालत का अंदाज़ा

और तो और कुछ देशों में तो कोरोना से मरने वालों का अंतिम संस्कार कराने के लिए वेटिंग लिस्ट में नाम दर्ज है उनको अब तक सुपुर्द-ए-खाक नहीं किया जा सका है। इटली की स्वास्थ एजेंसी के लिए सबसे चिंताजनक बात ये है कि अब ये संक्रमण इटली के दक्षिणी भाग में फैलने की दिशा में बढ़ गया है। अगर दक्षिणी भाग में भी ये संक्रमण इसी तरह फैलता है तो फिर पूरे इटली की भयावह हालत का अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता।

दिल्ली, यूपी और बिहार सरकार ने लॉकडाउन में गरीबों को दिया अनोखा तोहफा, जानिए यहां


नई दिल्ली: देश में लॉकडाउन से कई गरीब परिवारों के लिए गुजर बसर करना बेहद ही मुश्किल हो गया है. रोज कमाने और रोज खाने वालों की जिंदगी पर खासा प्रभाव पड़ा है. जिसे देखते हुए कई राज्य सरकारों ने बड़ा फैसला लिया है. दिल्ली सरकार ने दिहाड़ी मजदूरों को 5-5 हजार देने का ऐलान किया है. यूपी सरकार श्रमिकों को एक-एक हजार रुपये देगी. बिहार सरकार ने भी गरीबों के लिए एक महीने का मुफ्त राशन और एक हजार रुपये देने की घोषणा की है.

दिल्ली के दिहाड़ी मजदूरों को 5-5 हजार रुपये भत्ता

कोरोना वायरस की वजह से ठप कामकाज से प्रभावित दिहाड़ी मजदूरों को दिल्ली सरकार ने पांच-पांच हजार रुपये भत्ता देने का ऐलान किया है. इसके अलावा केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में कोरोना संकट के दौरान गरीबों के लिए मुफ्त राशन का इंतजाम किया है. इससे पहले दिल्ली सरकार ने विधवा, बुजुर्ग और दिव्यांगों की पेंशन दोगुनी करने का भी ऐलान किया था. अरविंद केजरीवाल ने जनता से मुख्यमंत्री राहत कोष में दान देने की भी अपील की है.

दिल्ली सरकार की अपील पर सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने राजधानी के रैन बसेरों में लंगर बांटने की सेवा शुरू कर दी है.

घर-घर राशन पहुंचाएगी सरकार

यूपी के सीएम योगी ने ऐलान किया है कि 21 दिनों के लॉकडाउन के दौरान सरकार घर-घर राशन और अन्य जरूरी सामान पहुंचाएगी. इसके साथ ही योगी सरकार ने प्रदेश के श्रमिकों को एक-एक हजार रुपये का भत्ता देने की घोषणा की है.

बिहार सरकार का बेहतरीन फैसला

बिहार के सीएम नीतीश ने डॉक्टरों और अन्य मेडिकल स्टाफ को एक महीने की अतिरिक्त बेसिक सैलरी देने का ऐलान किया है. बिहार में सभी राशन कार्डधारी परिवारों को एक महीने का मुफ्त राशन और 1000 रुपये मिलेंगे. विधवा, बुजुर्ग और दिव्यांग को तीन महीने की अग्रिम पेंशन तत्काल खाते में ट्रांसफर की जाएगी.

वहीं केरल सरकार ने कोरोना संकट से उबरने के लिए 20 हजार करोड़ रुपये के विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा की है. महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे ने राज्य के लोगों से घर में रहने की अपील की है…साथ ही भरोसा दिया है कि खाने पीने की चीजों, सब्जियों की सप्लाई में कोई कमी नहीं होने दी जाएगी.

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